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अगर फ्लोरोसिस दांतों में पीलेपन की है वजह, तो जानिए क्या होगा इसका इलाज

अगर फ्लोरोसिस दांतों में पीलेपन की है वजह, तो जानिए क्या होगा इसका इलाज ?

दांतों का पीला पड़ना कही न कही आज भी लोगों के लिए काफी गंभीर समस्या है, वहीं दांतों के पीले पड़ने का संबंध फ्लोरोसिस के साथ कैसे है, और कैसे हम दांतों के पीलेपन की समस्या से खुद का बचाव कर सकते है इसके बारे में आज के लेख में चर्चा करेंगे ;

क्या है दांतों में फ्लोरोसिस की समस्या ?

  • जब हमारे दांत पीले हो जाते है और उन पर तरह-तरह के दाग धब्बे नज़र आने लगते है तो समझ ले की आपके दांतों में फ्लोरोसिस की समस्या है। 
  • वहीं बात करें दांतों को मजबूती प्रदान करने के लिए फ्लोराइड की जरूरत होती है और तक़रीबन हर टूथपेस्ट में फ्लोराइड का इस्तेमाल किया जाता है। 
  • लेकिन कहा जाता है न की किसी भी चीज की अति हमेशा नुकसानदायक ही साबित होती है, इसलिए जब हम बहुत ज्यादा फ्लोराइड का इस्तेमाल कर लेते है तो हमारे दांतों में फ्लोरोसिस की समस्या हो जाती है। 
  • इसके अलावा जब एक बार हमारे दांत फ्लोरोसिस वाले उत्पन्न हो जाते है तो हमारे दांतों की रक्षा फ्लोराइड भी नहीं कर पाते।

क्या है बच्चों में फ्लोरोसिस का खतरा ?

  • जब हम 8 साल से कम उम्र के बच्चों को ज्यादा फ्लोराइड वाला मंजन करवाते है, तो उनके दांतों में फ्लोरोसिस की समस्या हो सकती है, दरअसल फ्लोराइड हमारे दांतों के लिेए एक जरूरी तत्व है जो इसे मजबूती देता है। 
  • आमतौर पर सभी टूथपेस्ट में फ्लोराइड का इस्तेमाल किया जाता है, मगर छोटे बच्चों के दांतों के लिए फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा खतरनाक मानी जाती है, इसलिए बाजार से बच्चों के लिए कम फ्लोराइड वाला टूथपेस्ट जरूर लें।

फ्लोरोसिस के बारे में विस्तार से जानने के लिए लुधियाना में सबसे बेस्ट डेंटिस्ट का चयन करें।

फ्लोरोसिस क्या है ?

डेंटल फ्लोरोसिस एक कॉस्मेटिक स्थिति है जो दांत के विकास के चरणों में बाधा का काम करती है और ये समस्या अत्यधिक फ्लोराइड के संपर्क के कारण दांत में पाई जाती है। यह आमतौर पर तीन महीने से आठ साल के बीच के बच्चों को प्रभावित करता है, जो अधिक मात्रा में फ्लोराइड युक्त पानी, भोजन और पेय का सेवन करते है।

फ्लोरोसिस के लक्षण क्या है ?

  • दांतों में अत्यधिक पीलेपन का आना। 
  • हाथ और पैर का आगे या पीछे की ओर मुड़ जाना। 
  • पांव का बाहर या अंदर की ओर धनुषाकार हो जाना। 
  • घुटनों के आसपास सूजन की समस्या। 
  • झुकने या बैठने में परेशानी का सामना करना। 
  • कंधे, हाथ और पैर के जोडों में दर्द की समस्या। 
  • जवानी में ही बुढ़ापे के लक्षण का नजर आना। 
  • पेट का भारी होना आदि। 

फ्लोरोसिस से कैसे करें खुद का बचाव ?

  • यदि दांतों को फ्लोरोसिस से बचाना है तो इसके लिए आपको फ्लोराइड का सेवन करना चाहिए और आपको बता दे की ये फ्लोराइड पीने के पानी या नल्के के पानी में पाया जाता है। 
  • अधिक फ्लोराइड युक्त बोतलबंद पानी, कुकीज़ और फ्लोराइड युक्त शिशु आहार जैसे उत्पाद फ्लोरोसिस का कारण बन सकते है। 
  • दूसरा स्रोत फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट है। 3 महीने से 8 साल की उम्र के दौरान (जब दूध और स्थायी दांत विकास के चरण में होते है) फ्लोराइड टूथपेस्ट के अत्यधिक उपयोग से दांत में फ्लोरोसिस होता है।
  • दांतों की मजबूती बढ़ाने के लिए माता-पिता बच्चों को ऐसी दवाएं देते है, जिनमें फ्लोराइड होता है। इन दवाओं के अधिक सेवन से फ्लोरोसिस रोग हो सकता है
  • पीने के पानी में भी फ्लोराइड होता है, लेकिन सीमा से अधिक फ्लोराइड, दंत के साथ-साथ कंकाल/हड्डी फ्लोरोसिस का गंभीर मामला हो सकता है।

यदि अत्यधिक फ्लोरोसिस के कारण आपके बच्चे के दांत सड़ गए है, तो इससे बचाव के लिए आपको पंजाब में रूट कैनाल ट्रीटमेंट का चयन करना चाहिए।

फ्लोरोसिस का इलाज क्या है ?

  • फ्लोरोसिस का इलाज करना वैसे तो मुश्किल है, खासकर जब इसका स्थायी परिवर्तन हो जाए तब।
  • अत्यधिक फ्लोराइड के हानिकारक प्रभावों को कम करने के लिए विटामिन-सी, डी, एंटीऑक्सिडेंट और कैल्शियम युक्त पोषक तत्वों की खुराक की सलाह दी जाती है।

अगर आप भी फ्लोरोसिस की समस्या का इलाज करवाना चाहते है तो इसके लिए आपको फॉक्स डेंटल क्लिनिक का चयन करना चाहिए। 

निष्कर्ष :

फ्लोरोसिस की समस्या ज्यादातर बच्चो को अपने गिरफ्त में लेती है, इसलिए जरूरी है की माता-पिता इस बात का ध्यान रखें की उनके बच्चे फ्लोराइड का ज्यादा इस्तेमाल न करें।

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